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सनातन संस्कृति नीरस तुम ही हो sundrta ना हम तुम ही क्यों उमंग उल्लास परम आनंद रस पी संवेदन सेवक ही देवत्व देते हैं इंसानियत ही ईश्वरत्व होता है प्यार ही प्यार दूर तक देखा तू ही दैवी शक्ति माँ भगवद् गीता न भुलाएं पड़ोसी खुशी का रस हम में ही थे। तू ही है देखते ही रहे

Hindi रस ही रस Quotes